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उत्पादन संभावना वक्र का खिसकाव या स्थान - परिवर्तन / घुमाव ( Shifting / Rotation of Production Possibility Curve )
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उत्पादन संभावना वक्र का खिसकाव या स्थान - परिवर्तन / घुमाव ( Shifting / Rotation of Production Possibility Curve )
उत्पादन संभावना वक्र निम्नलिखित कारणों से खिसकता (Shift ) है अथवा उसका ( Rotation ) होता है :
(i) संसाधनों में परिवर्तन ( Change in Resources )
( a ) संसाधनों में वृद्धि ( Resources are Increased ) : यदि संसाधनों में वृद्धि होती है , तब हम दोनों वस्तुओं का अधिक उत्पादन कर सकते हैं । तदनुसार , उत्पादन संभावना वक्र दाईं ओर खिसक जाता है , जैसे चित्र 3 में दिखाया गया है ( ab से a1 b1 की ओर खिसकाव ) :
समय के साथ एक उद्यमी अधिक संसाधन पूँजी स्टॉक के रूप में प्राप्त कर सकता है । इससे उसकी उत्पादन क्षमता बढ़ती है । इसके अनुरूप PPC का विस्तार होता है या PPC दाईं ओर ab से a1b1 की ओर खिसक जाता है ।
( b ) संसाधनों में कमी ( Resources are Decreased ) : यदि संसाधनों में कमी होती है , तब हम दोनों वस्तुओं का कम उत्पादन कर सकते हैं । तदनुसार , उत्पादन संभावना वक्र बाईं ओर खिसक जाता है , जैसे चित्र 4 में दिखाया गया है ( ab से a1 b1 की ओर खिसकाव ) :
समय के साथ किसी उद्यमी का पूँजी स्टॉक कम हो सकता है । इससे उसकी उत्पादन क्षमता कम हो जाती है । इसके अनुरूप PPC का संकुचन होता है या PPC बाई ओर ab से a1b1 की ओर खिसक जाता है ।
(2) तकनीक में परिवर्तन ( Change in Resources )
( a ) वस्तु- x के उत्पादन के लिए कुशल तकनीक
( Efficient Technology for the Production ofCommodity - X ) : वस्तु- x के उत्पादन के लिए कुशल तकनीक से अभिप्राय है कि उपलब्ध संसाधनों के प्रयोग से वस्तु- X की अधिक मात्रा का उत्पादन किया जा सकता है । तदनुसार , उत्पादन संभावना वक्र घूमेगा ( खिसकेगा नहीं ) , जैसे चित्र 5 में दिखाया गया है ( ab से ab1 की ओर घुमाव ) :
वस्तु- x के लिए प्रयोग कुशल तकनीक वस्तु- X की उत्पादकता बढ़ा देती है । इसके अनुरूप वस्तु- X की अधिक मात्रा का उत्पादन पहले वाले ( समान ) संसाधनों से किया जा सकता है । PPC दाईं ओर , ab से ab1 की ओर घूम जाता है । वस्तु- Y के लिए समान तकनीक का अर्थ है कि वस्तु- Y का अधिकतम उत्पादन स्थिर / समान रहता है और यह oa के बराबर है ।
( b ) वस्तु- Y के उत्पादन के लिए कुशल तकनीक ( Efficient Technology for the Production of Commodity Y ) : वस्तु- Y के उत्पादन के लिए कुशल तकनीक से अभिप्राय है कि उपलब्ध संसाधनों के प्रयोग से वस्तु- Y की अधिक मात्रा का उत्पादन किया जा सकता है । तदनुसार , उत्पादन संभावना वक्र घूमेगा ( खिसकेगा नहीं ) , जैसे चित्र 6 में दिखाया गया है ( ab से a1b की ओर घुमाव )
वस्तु- Y के लिए प्रयोग कुशल तकनीक वस्तु- Y की उत्पादकता बढ़ा देती है । इसके अनुरूप वस्तु- Y का अधिक उत्पादन पहले वाले ( समान ) संसाधनों से किया जा सकता
है । अतएव PPC वक्र , ab से की ओर , घूम जाता है । वस्तु- x के लिए समान तकनीक का अर्थ है कि वस्तु- x का अधिकतम उत्पादन स्थिर / समान रहता है और यह Ob के समान है ।
( c ) दोनों वस्तुओं ( X और Y ) के उत्पादन के लिए कुशल तकनीक ( Efficient Technology for the Production of both X and Y ) : दोनों वस्तुओं के उत्पादन के लिए कुशल तकनीक का अर्थ है कि समान संसाधनों द्वारा दोनों ही वस्तुओं X और Y का ' अधिक उत्पादन संभव है । तदनुसार , उत्पादन संभावना वक्र दाई ओर खिसकेगा , जैसे चित्र 7 में दिखाया गया है ( ab से a1 b1 की ओर खिसकाव ) :
वस्तु- x तथा वस्तु- Y दोनों में प्रयोग कुशल तकनीक वस्तु- x तथा वस्तु- Y दोनों की उत्पादकता बढ़ा देती है । इसके अनुरूप वस्तु- x तथा वस्तु- Y दोनों का अधिक उत्पादन पहले वाले ( समान ) संसाधनों से किया जा सकता है । अतएव PPC वक्र दाईं ओर खिसक कर ab से a1b1 हो जाता है ।
उपभोक्ता सन्तुलन के परिवर्तनकारी तत्व तटस्थता वक्र विश्लेषण के अन्तर्गत अभी तक हमने जिस सन्तुलन का अध्ययन किया उसमें दो आधारभूत मान्यताओं को स्वीकार किया गया है— ( 1 ) उपभोक्ता की आय में किसी तरह का परिवर्तन नहीं होता तथा ( 2 ) वस्तुओं की कीमतें स्थिर हैं । यदि हम इन मान्यताओं को हटा दें तो तीन प्रकार के परिवर्तन सम्भव हो सकते हैं— ( i ) जब उपभोक्ता की आय में परिवर्तन हो जाए , परन्तु कीमतें स्थिर रहें । ( ii ) उपभोक्ता की मौद्रिक आय में परिवर्तन न हो , जबकि कीमतों में परिवर्तन हो जाए , तथा ( iii ) जब उपभोक्ता की आय तथा कीमत दोनों में परिवर्तन हो जाए । उपर्युक्त परिवर्तनों का अध्ययन क्रमशः निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत किया जाता है---- ( 1 ) आय प्रभाव ( 2 ) प्रतिस्थापन प्रभाव ( 3 ) कीमत प्रभाव आय प्रभाव...
तटस्थता वक्र विश्लेषण द्वारा उपभोक्ता का सन्तुलन ( INDIFFERENCE CURVE ANALYSIS OF CONSUMER'S EQUILIBRIUM ) प्रत्येक उपभोक्ता चाहता है कि उसे सीमित साधनों से अधिक उपयोगिता मिले , परन्तु आय की सीमितता के कारण वह अपने सन्तोष को उस बिन्दु तक नहीं ले जा सकता जहां वह ले जाना चाहता है । अतः उपभोक्ता अपनी निश्चित आय और दी हुई कीमतों से अधिकतम सन्तोष को प्राप्त करने का प्रयत्न करता है । अधिकतम सन्तोष का यह बिन्दु ही उपभोक्ता के सन्तुलन का विन्दु कहलाता है । उपभोक्ता के सन्तुलन का अर्थ ( Meaning of Consumer's Equilibrium ) - जब एक उपभोक्ता अपनी दी हुई आय को दी हुई कीमतों पर वस्तुओं के किसी निश्चित संयोग पर इस प्रकार खर्च करे कि उसको उस संयोग से अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त हो तो सम्बन्धित संयोग बिन्दु उपभोक्ता के लिए सन्तुलन का बिन्दु कहलाएगा । वह अन्य बातों ( उसकी आय व वस्तु...
एंजिल वक्र ( ENGEL'S CURVE ) एंजिल वक्र किसी वस्तु विशेष की मांगी गई मात्रा तथा उपभोक्ता की आय के बीच सम्बन्ध प्रदर्शित करता है । उन्नीसवीं शताब्दी में जर्मनी के अर्नेस्ट एंजिल ( 1821-1896 ) ने उपभोग व्यय की संरचना अर्थात आय के विभिन्न स्तरों पर परिवारों द्वारा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर व्यय पद्धति जानने हेतु पारिवारिक बजटों का अनुभवगम्य अध्ययन किया । इस अध्ययन में उन्होंने पाया कि दी गई आदत एवं वरीयता दशाओं के अन्तर्गत खाधान्न पर व्यय की जाने वाली आय का अनुपात आय के बढ़ने के साथ - साथ घटता है । आय के विभिन्न स्तरों तथा वस्तु विशेष की खरीदी गई मात्राओं के बीच सम्बन्ध प्रदर्शित करने वाले वक्र का नाम एंजिल वक्र। ( Engel's Curve ) रखा गया । (A)आवश्यक वस्तुओं के लिए एंजिल वक्र--- ...
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